10 Hindi Chapter 5 गिरगिट अंतोन चेखव

Chapter Notes and Summary
रूस के महान् लेखक अंतोन चेखव दुनिया के चहेते कहानीकार हैं। उनकी कहानियों में सत्य ही सर्वोपरि है। सत्य के प्रति आस्था और निष्ठा ही चेखव की शक्ति है। ‘गिरगिट’ अंतोन चेखव की प्रसिद्ध कहानी है। इस कहानी में लेखक ने रूस की उस शासन-व्यवस्था का वर्णन छोटे-से कथानक में कर दिया है‚ जब जारशाही शासन चापलूसों‚ भाई-भतीजावाद के पोषक प्रशासकों की बदौलत चल रहा था। ऐसे में कानून का शासन तथा समता की स्थापना एक स्वप्न बन जाता है। आम आदमी उपेक्षित तथा सामर्थ्यवान शक्तिशाली बन जाते हैं। गोस्वामी तुलसीदास ने ऐसी ही शासन-व्यवस्था के लिए लिखा था— ‘समरथ को नहिं दोष गुसाई’।
प्रस्तुत पाठ ‘गिरगिट’ के माध्यम से अंतोन चेखव ने दिखाना चाहा है कि अच्छी शासन-व्यवस्था समता पर आधारित होती है। इसमें जनता में कानून के प्रति आदर तथा समर्पण का भाव होता है। भयमुक्त समाज के निर्माण के लिए अधिकारियों तथा प्रशासकों को पक्षपातरहित अपने कर्त्तव्यों का निर्वाह करना जरूरी है। यदि ऐसा नहीं हुआ तो देश को अराजकता से बचाना संभव नहीं है।
चेखव की कहानी ‘गिरगिट’ चापलूस तथा पक्षपाती प्रशासन की कलई खोलती है।
ओचुमेलॉव एक पुलिस इंस्पेक्टर है। एक दिन वह सिपाही येल्दीरीन के साथ चौराहे से गुजर रहा था। उसी समय ख्यूक्रिन नामक एक आदमी‚ जिसे एक छोटे पिल्ले ने घायल कर दिया था‚ उस पिल्ले के पीछे भागता हुआ‚ चौराहे तक आया। एक भीड़ ने ख्यूक्रिन तथा पिल्ले को घेर लिया। ओचुमेलॉव ने भीड़ को डाँटते हुए जमा होने का कारण पूछा। ख्यूक्रिन ने पिल्ले द्वारा अपनी उँगली काट खाने की बात इंस्पेक्टर ओचुमेलॉव को बताई।
ओचुमेलॉव ने पिल्ले के मालिक को सबक सिखाने की बात कहते हुए‚ उसके मालिक का पता लगाने के लिए येल्दीरीन को कहा। भीड़ से एक व्यक्ति ने बताया कि यह कुत्ता ‘जनरल झिगालॉव’ का है। जनरल झिगालॉव का नाम सुनते ही इंस्पेक्टर ओचुमेलॉव का रुख ही बदल गया। उसने ख्यूक्रिन को दोषी बताया तथा कुत्ते की नस्ल को बेहतर बताते हुए‚ उसे जनरल साहब के घर तक छोड़ने की बात की।
कुछ देर बाद भीड़ इस बात की चर्चा करने लगी कि मरियल-सा कुत्ता जनरल साहब का नहीं हो सकता। इस बार ओचुमेलॉव ने कुत्ते को समाप्त करने का आदेश दिया। किंतु उसी समय जनरल साहब का बावर्ची सामने दिख गया।
उसके यह बताने पर कि कुत्ता जनरल साहब के भाई वाल्दीमीर इवानिच का है‚ ओचुमेलॉव एक बार पुन: परिवा तत हो गया। उसने बावर्ची प्रोखोर को ससम्मान कुत्ता सौंप दिया तथा ख्यूक्रिन को ‘ठीक करने’ की धमकी देता हुआ चला गया।
इस कहानी को ‘गिरगिट’ शीर्षक देना भी ओचुमेलॉव के व्यक्तित्व के कारण ही संभव हुआ है। ‘गिरगिट’ अपनी सुरक्षा के लिए रंग बदलता रहता है।
ओचुमेलॉव ने भी एक कुत्ते के बारे में (तथ्यों की जानकारी) बदलते ही अपनी प्रतिक्रिया को कई बार परिवा तत किया। इस कहानी से समाज तथा प्रशासन की विसंगति सामने आती है‚ जिसमें शक्तिसम्पन्न व्यक्ति की सत्ता को कानून से अधिक महत्त्व दिया जाता है।

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