10 Hindi Chapter 4 तोप वीरेन डंगवाल

Chapter Notes and Summary
कविता का परिचय
भारत का ऐतिहासिक काल काफी लंबा है। इस विशाल देश ने इतिहास में कई पड़ाव देखे हैं। ऐसा ही एक समय आया‚ जब ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी भारत में व्यापार करने आई। इस व्यापारिक कंपनी ने धीरे-धीरे शासकों की कमजोरी का लाभ उठाकर अपनी सत्ता स्थापित कर ली। कंपनी ने देश के विभिन्न भागों में बड़े-बड़े उद्योगों की स्थापना के साथ बागों का निर्माण भी किया। बागों के साथ शासकों ने तोप भी बनवाईं। तोपों का प्रयोग विद्रोहों के दौरान देशभक्तों को मौत के घाट उतारने के लिए किया गया। एक दिन ऐसा आया‚ जब हमारे पूर्वजों ने विदेशी सत्ता को उखाड़ फेंका। तोप की शक्ति जनशक्ति के सामने निस्तेज हो गई। इन निस्तेज तोपों को प्रतीक के रूप में रखा गया। एक ऐसी ही ‘तोप’ जिसकी कवि चर्चा करता है‚ कानपुर के कंपनी बाग के मुहाने पर रखी है। इस प्रतीक के बहाने हमें यह याद दिलाई जाती है कि भविष्य में फिर कोई कंपनी अपने पाँव फैलाकर वैसा ही तांडव न मचा सके‚ जिसके घाव अब भी हरे हैं। वैसे देश की एकता और वीरता से उनकी तोप का मुँह बंद कर दिया जाएगा‚ किंतु हमें सावधान रहना चाहिए।
‘तोप’ शीर्षक कविता प्रतीक के माध्यम से हमें इतिहास की एक भूल की याद दिला‚ भविष्य के प्रति सचेत करने की प्रक्रिया है। कवि वीरेन डंगवाल साधारण विषय के माध्यम से विलक्षण राष्ट्रीय चेतना को सामने लाने में सफल हुए हैं।
कवि वीरेन डंगवाल के दो काव्य-संग्रह ‘इसी दुनिया में’ तथा ‘दुश्चक्र में दाष्टा’ प्रकाशित हो चुके हैं। ‘दुश्चक्र में दाष्टा’ के लिए कवि को ‘साहित्य अकादमी पुरस्कार’ भी मिल चुका है।
कविता का भावार्थ
कंपनी बाग के मुहाने पर ………… साल में चमकाई जाती है दो बार।
भावार्थ कंपनी बाग के मुहाने पर वर्ष 1857 में अंग्रेजों द्वारा प्रयुक्त तोप को संभाल कर रखा गया है। विरासत में मिले कंपनी बाग की तरह ही ‘तोप’ की भी देखभाल की जाती है। इसे वर्ष में दो बार गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) तथा स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) पर चमकाया जाता है।
कवि ने इन पंक्तियों में ब्रिटिश सत्ता द्वारा निर्मित दो प्रतीकों की ओर संकेत किया है। एक है—कंपनी बाग और दूसरा कंपनी बाग के मुहाने पर पड़ी ‘तोप’।
यह तोप देश के उन जाँबाजों का काम तमाम करने में प्रयुक्त हुई‚ जो स्वाधीनता की माँग कर रहे थे। ‘तोप’ को आज भी विरासत रूप में रख कर इसलिए चमकाया जाता है कि हम याद रखें अपने पूर्वजों और विदेशी सत्ता को। ऐसी कंपनियाँ फिर न आ सकें‚ जो देश के लिए विनाशकारी बन जाएँ।
काव्यगत विशेषताएँ
• सीधी‚ सरल भाषा का प्रयोग कविता में किया गया है।
• ‘धर रखी’ जैसे क्षेत्रीय भाषिक प्रयोग तथा प्रतीकों का सुंदर उपयोग काव्यांश में हुआ है।
• ‘धर’ का प्रयोग कई अर्थों में हुआ है। यह हैं—धरोहर‚ संचय इत्यादि।
सुबह-शाम कंपनी बाग में आते हैं ………………… अपने जमाने में।
भावार्थ कंपनी बाग में सुबह-शाम बड़ी संख्या में आस-पास के लोग घूमने आते हैं। बाग के प्रवेश द्वार पर रखी तोप अपने दुर्दांत होने का पता दे रही है।
जैसे वह कह रही हो कि मैंने अच्छे-अच्छे वीरों के टुकड़े कर दिए थे।
कवि इस काव्यांश में यह बताना चाहता है कि कंपनी बाग के मुहाने पर रखी तोप सामान्य है। वर्ष 1857 के महाविद्रोह में तोपों के मुँह पर देशभक्तों को बाँध कर उड़ा दिया गया था। आज जो ‘तोप’ उपेक्षित है‚ उसने कितने ही वीरों का जिस्म विदीर्ण किया है। आज जब हम आजाद हैं तो हमें उस तोप से सबक लेना चाहिए‚ जिसने हमारे पूर्वजों को अत्यधिक पीड़ा दी। अब भविष्य में कोई कंपनी देश में अपनी ‘तोप’ इस्तेमाल न कर सके‚ इसके लिए हमें सचेत रहना चाहिए।
काव्यगत विशेषताएँ
• कवि छंदमुक्त कविता के माध्यम से अपनी बात कहता है।
• ‘अपने जमाने में’ अतीत का वर्तमान में सुंदर प्रयोग के लिए आया है।
अब तो बहरहाल ………….. एक दिन तो होना ही है उसका मुँह बंद।
भावार्थ कंपनी बाग के मुहाने पर रखी हुई तोप वर्ष 1857 में जितनी भी आग उगलती रही हो पर आज छोटे लड़कों की घुड़सवारी का खिलौना है। जब लड़कों की घुड़सवारी से तोप खाली होती है तो चिड़ियाँ बैठकर मानो आपस में बातें कर रही होती हैं। कभी-कभी छोटी चिड़ियाँ खास कर गौरैया तोप के मुँह में प्रवेश कर जाती हैं। ये छोटी-छोटी गौरैया यह बताती प्रतीत होती हैं कि एक दिन हर तोप का मुँह बंद हो जाता है तथा जनशक्ति के सामने हर निरंकुश सत्ता को झुकना पड़ता है।
वीरेन डंगवाल ने ‘तोप’ कविता की इन पंक्तियों में ‘तोप’ की वर्तमान स्थिति को दिखाते हुए‚ यह बताना चाहा है कि हर आततायी शक्ति का अंत होता है और अंतत: वह इसी ‘तोप’ की तरह उपेक्षित हो जाती है।
काव्यगत विशेषता
• कविता में अतीत तथा वर्तमान दोनों को एक-दूसरे से जोड़ने के लिए कम शब्दों में अभिनव प्रयोग कवि ने किया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *