You are here
Home > Books > 10 उपचारात्मक शिक्षण (Language Hindi & Pedagogy CTET & TET Exams)

10 उपचारात्मक शिक्षण (Language Hindi & Pedagogy CTET & TET Exams)

10 उपचारात्मक शिक्षण

उपचारात्मक शिक्षण तथा इसका महत्व
छात्रों की प्रगति पर ध्यान दिए बिना पहले प्रत्येक छात्र को समान समझ कर शिक्षा दी जाती थी। जिससे कुछ विद्यार्थी प्रगति कर लेते थे और कुछ पिछड़ जाते थे। इन पिछड़े विद्यार्थियों की उपेक्षा की जाती थी। मनोविज्ञान के अनुसार सभी विद्यार्थियों के सीखने और समझने की शक्ति एक समान नहीं होती। नवीन शिक्षा पद्धति में इन विद्यार्थियों के सीखने में होने वाली कठिनाईयों का पता लगाने की प्रक्रिया ‘निदानात्मक’ शिक्षण के नाम से जानी जाती है। इन कठिनाइयों को दूर करने के लिए किया जाने वाला शिक्षण ‘उपचारात्मक शिक्षण’ है।
उपचारात्मक शिक्षण का महत्व
निदानात्मक शिक्षण द्वारा विद्यार्थियों को सीखने में आने वाली कठिनाइयों का पता चल जाता है।
► उपचारात्मक शिक्षण के द्वारा उन कठिनाईयों को दूर करके विद्यार्थी के व्यक्तिगत विकास को बल दिया जाता है।
► छात्रों की हेय भावना दूर करने में उपचारात्मक शिक्षण महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
► ‘उपचारात्मक शिक्षण‘ शिक्षण को प्रभावशाली बनाने में सहायक होता है।
► उपचारात्मक शिक्षण अच्छे शिक्षण का एक महत्त्वपूर्ण अंग है। इसका प्रयोग प्रारम्भिक स्तर से लेकर कॉलेज की कक्षाओं तक किया जाना चाहिए।
भाषागत दोष: भाषा को उच्चारित करते समय विद्यार्थियों का अस्पश्ट उच्चारण, हकलाना, तुतलाना, अलग ध्वनि का उच्चारण तथा शीघ्र एवं अस्पश्ट वाणी विद्यार्थी के भाषागत दोष होते हैं।
वाचन सम्बन्धित दोष एवं उपचार
आज शिक्षण में विद्यार्थियों की वाचन सम्बन्धित समस्या बड़ी समस्या के रूप में हमारे सामने खड़ी है। वाचन की समस्या विद्यार्थियों के व्यक्तित्व के विकास में एक बाधा होती है। वाचन दोषों के कारण होने वाली समस्या विद्यार्थियों में तनाव उत्पन्न करती है। उपचारी शिक्षण केवल कक्षा के उन विद्यार्थियों को केन्द्र में रखकर किया जाता है। विद्यार्थी उच्चारण में निम्न गलतियाँ करते हैं –
► स्वरों का लोप
► मात्राओं की गलतियाँ
► स, ष, श के बीच भेद करने की समस्या
► चन्द्रबिन्दु तथा अनुस्वार के बीच फर्क करने में
► अल्पप्राण और महाप्राण सम्बन्धित भ्रम
► य और ज का गलत प्रयोग
► उच्चारण सम्बन्धित दोषों के निवारण के लिए शिक्षक को कक्षा में आदर्श वाचन करके विद्यार्थियों को सस्वर वाचन विधि के द्वारा बार-बार वाचन का अभ्यास कराया जाना चाहिए। प्रारंभिक कक्षाओं में अनुकरण विधि उच्चारण दोषों के निराकरण में प्रभावी सिद्ध होती है। विद्यार्थियों को ये शिक्षा दी जानी चाहिए कि उच्चारण करते समय किस शब्द पर कितना बल देना चाहिए। अन्य विषयों के शिक्षकों को भी अपने उच्चारण का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
► रेखाचित्रण द्वारा विद्यार्थियों को उनकी प्रगति की सूचना उन्हें शिक्षक द्वारा उपलब्ध करायी जानी चाहिए।
► विद्यार्थियों को शुद्ध उच्चारण के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
► विद्यार्थी को कराये जाने वाले कार्यों में विभिन्नता होनी चाहिए जिससे उसकी रुचि अभ्यास में बनी रहे।
► उच्चारण दोषों के समाधान के लिए बहुभाषी कक्षा एक महत्त्वपूर्ण साधन है, जिसके द्वारा विभिन्न भौगोलिक पृश्ठभूमि से आये बच्चों की मातृभाषा का अनादर किये बिना, उन्हें मानक भाषा की शिक्षा दी जा सकती है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को सही उच्चारण हेतु प्रेरित किया जा सकता है।
छात्रों के वाचन दोष का कारण: निम्न कारणों की वजह से विद्यार्थियों में वाचन सम्बन्धित दोष होते हैं –
► छात्र का स्वास्थ्य
► ज्ञानेंद्रियों सम्बन्धित दोष
► घर का वातावरण
► मंद बुद्धि
► मानसिक तनाव
► वाचन का कम अभ्यास
► अध्यापक की अयोग्यता
वाचन दोषों का उपचार
छात्र का स्वास्थ्य: विद्यार्थी के स्वास्थ्य का उसके उच्चारण और सीखने पर अत्यधिक प्रभाव देखा जाता है। अगर विद्यार्थी पूरी तरह से स्वस्थ नहीं है, तो वह छोटी से छोटी तथ्यात्मक बात भी कक्षा में नहीं समझ पाता। इस स्थिति में शिक्षक को विद्यार्थी के साथ सहानुभूति दिखानी चाहिए तथा उसके परिजनों को उसके स्वास्थ्य की सूचना देनी चाहिए।
ज्ञानेन्द्रियाँ सम्बन्धित दोष: विद्यार्थी भाषा बोलने और सुनने के लिए अपनी ज्ञानेन्द्रियों (मुख-कान) का प्रयोग करता है। यदि इन ज्ञानेन्द्रियों में किसी प्रकार का दोष हो, तो विद्यार्थी को उच्चारण में कठिनाई होने लगती है। शिक्षक को विभिन्न विधियों के प्रयोग द्वारा विद्यार्थी को सही उच्चारण करने का अभ्यास करना चाहिए। शिक्षक द्वारा इस स्थिति में विद्यार्थी के परिजनों को उपयुक्त ज्ञानेन्द्रियों के इलाज की सलाह भी दी जानी चाहिए।
घर का वातावरण: विद्यार्थी अपने परिवार के सदस्यों की भाषा का अनुकरण करके भाषा सीखता है। यदि परिवार में किसी शब्द या ध्वनि का गलत उच्चारण होता है, तो विद्यार्थी भी उस शब्द या ध्वनि का गलत उच्चारण करने लगता है। विद्यार्थी की इस समस्या के समाधान के लिए उसे समृद्ध भाषिक परिवेश उपलब्ध कराना चाहिए, जिसमें विद्यार्थी को शब्दों का सही एवं स्पश्ट उच्चारण सुनने को मिले। शिक्षक द्वारा शिक्षण में रेडियो, टेपरिकॉर्डर का प्रयोग विद्यार्थी को सही उच्चारण सीखने में सहायक है। साथ ही, भाशा प्रयोगशालाएँ स्थापित कर विद्यार्थियों को शब्दों के सही व स्पश्ट उच्चारण करने में मदद मिल सकती है।
मानसिक तनाव: विद्यार्थी भय और संकोच की वजह से अपनी अभिव्यक्ति स्पश्ट रूप से नहीं कर पाते, शिक्षक को चाहिए कि उन विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करे और उन्हें कक्षा में हो रही विभिन्न गतिविधियों में समान रूप से शामिल करें। ऐसा करने से विद्यार्थी का आत्मविश्वास बढ़ेगा और उसके तनाव में कमी होगी।
उच्चारण दोष के विभिन्न प्रकार
अशुद्ध उच्चारण के कई प्रकार हो सकते हैं। वर्णों के उच्चारण का उचित ज्ञान न होना, क्षेत्रीय बोलियों का प्रभाव या उच्चारण अंगों में दोश होना आदि। उच्चारण दोश के विभिन्न प्रकारों का वर्णन निम्नलिखित प्रकार से है-
► स्वरागम दोश- उच्चारण करते समय किसी अन्य स्वर का आना। जैसे- स्टेशन को इस्टेशन कहना।
► स्वरभक्ति दोश- इसमें उच्चरित स्वर का बढ़ाकर उच्चारण किया जाता है। जैसे- वीरेन्द्र को वीरेन्दर, प्रताप को परताप कहना।
► न तथा ण का उच्चारण- यथा: प्रणव को प्रनव या मरण को मरन कहना।
► इ, उ का ई, ऊ के साथ भ्रम उत्पन्न होना- भूल को ‘भुल’, कवि को ‘कवी’ कहना।
► क्ष और छ का भ्रम- जैसै- लक्ष्मण को लछमन बोलना।
► व तथा ब का भ्रम- जैसे- विवेक को बिबेक, विश्लेशण को बिश्लेशण कहना।
► ‘स’ को ‘श’ तथा ‘श’ को ‘स’ बोलना- जैसे- शिवम को सिवम, सस्वर को शस्वर कहना।
► य तथा ज का भ्रम- यमराज को जमराज लिखना।
► चन्द्रबिन्दु तथा अनुनासिक का भ्रम- जैसे- संग्राम को ‘संग्राँम’ कहना। उपर्युक्त उच्चारण दोशों के प्रकार के अतिरिक्त, उच्चारण दोश के कुछ अन्य प्रकार भी है जो कि शारीरिक या मनोवैज्ञानिक कारणों से होते हैं। शारीरिक दोश में मुख के किसी भाग यथा- जिह्वा, ओश्ठ, कंठ, तालु आदि में दोश होने के कारण उच्चारण अशुद्ध हो जाता है। मनोवैज्ञानिक कारण में, व्यक्ति जिस परिस्थिति में होता है उसके प्रभाव से उच्चारण कभी-कभी गड़बड़ा जाता है। डर, शंका आदि के कारण ऐसा हो जाता है। किसी शब्द या वाक्य को जल्दी से बोलना या अधिक समय लेकर खींच कर बोलने से भी उच्चारण सम्बन्धी दोश आ जाता है।

Top
error: Content is protected !!