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10. अधिगम सिद्धान्त (EVS Environment Studies for CTET & TET in Hindi)

10. अधिगम सिद्धान्त

बच्चे किस प्रकार सीखते हैं

अधिगम का अर्थ होता है- सीखना। अधिगम एक ऐसी प्रक्रिया है, जो जीवनपर्यन्त चलती रहती है एवं बालक अपने विभिन्न क्रियाकलापों एवं अनुभवों के द्वारा अनेक प्रकार के परिवर्तनों से ज्ञान अर्जित करता रहता है। जन्म के बाद से ही बच्चा सीखना प्रारम्भ कर देता है। सीखने की प्रक्रिया जन्मजात होती है। सभी बच्चे स्वभाव से ही सीखने के लिए सक्रिय रहते हैं और उनमें सीखने की क्षमता प्राकृतिक रूप से होती है। बच्चा अपने आस-पास के वातावरण से अनेक कार्यों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सीखता है। बालक में स्कूल के भीतर एवं बाहर दोनों जगहों पर सीखने की प्रक्रिया चलती रहती है। इन दोनों जगहों में यदि सम्बन्ध रहे, तो सीखने की प्रक्रिया पुश्ट होती है। सीखने की एक उचित गति होनी चाहिए। साथ ही सीखने में विविधता व चुनौतियाँ होनी चाहिए, ताकि बच्चा उसे पूरी लगन और श्रद्धा से करें।

विभिन्न आयु वर्ग के बच्चों में पर्यावरण की समझ

बच्चे जैसे-जैसे बढ़ते जाते हैं, उनमें सीखने की क्षमता बढ़ती जाती है। वह धीरे-धीरे समस्त वस्तुओं को जानने और पहचानने की कोशिश करता रहता है। जन्म से पाँच वर्श की उम्र तक तो बच्चा वस्तुओं को पहचानने लगता है परन्तु उसे उसके महत्व का अनुभव नहीं होता है। वह वस्तुओं को जानने का प्रयास करता है और उनसे संबंधित प्रश्नों को भी पूछता है। इस प्रकार वह अपने आस-पास की वस्तुओं के बारे में सीखता जाता है।
पर्यावरण के बारे में वर्ष के बच्चों की समझ
5-7 वर्श की उम्र में बच्चा अच्छी तरह सोच समझ नहीं सकता है। उसके अन्दर सीखने की ललक तो होती है परन्तु स्वयं से कुछ करने की क्षमता नहीं होती है सोचने एवं तर्क करने की शक्ति में पूर्ण रूप से सक्षम न होने के कारण वह पर्यावरण में होने वाली घटना को अधिक महत्व नहीं दे पाता है। क्योंकि उसे पर्यावरण के बारे में अधिक जानकारी नहीं होती है। उसे अपने आस-पास के परिवेश के बारे में सामान्य जानकारी होती है। इस उम्र के बालक में पर्यावरण की विभिन्न घटनाओं जैसे- वर्शा, तूफान, भूकम्प आदि की अवधारणाओं को समझने की शक्ति नहीं होती है। इस उम्र के बच्चों में पर्यावरण प्रदूशण हो रहा है कि नही हो रहा है, इसके संरक्षण के बारे में क्या उपाय हो सकता है, आदि की समझ नहीं होती है। धीरे-धीरे बच्चों को पर्यावरण से जोड़कर पर्यावरण के बारे में सिखाया जा सकता है।
पर्यावरण के बारे में 8दृ14

वर्ष के बच्चों की समझ

8-14 वर्श के बच्चों के अन्दर वस्तुओं को पहचानने, पृथक्कीकरण, वर्गीकरण आदि की क्षमता हो जाती है। वे पर्यावरण में होने वाली विभिन्न घटनाओं को, उसके हानि और लाभ को समझने लगते हैं। 8 से 14 वर्श की आयु के बच्चों की बुद्धि का पूर्ण विकास हो जाता है। 11 वर्श की आयु के बाद ही बच्चे में सभी प्रकार के सम्प्रत्ययों का समुचित विकास हो जाता है। इस उम्र के बच्चे में अपने परिवेश से संबंधित ज्ञान विकसित हो जाता है तथा पर्यावरण को समझने लगता है और पर्यावरण में प्रदूशण का क्या कारण है तथा इसे रोकने के क्या उपाय हो सकते हैं आदि की जानकारी हो जाती है। साथ ही, प्रदूशण मनुश्य के लिए हानिकारक है। इसलिए उसके स्वास्थ्य पर भी उसका असर हो सकता है इस बात की भी जानकारी उसे हो जाती है। इस प्रकार बालक के दैनिक क्रियाकलापों उसकी आयु एवं अनुभव को देखते हुए पर्यावरण से संबंधित उसकी समझ को देखा और परखा जा सकता है।

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