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1 अपठित गद्यांश एवं पद्यांश (Language Hindi & Pedagogy CTET & TET Exams)

1 अपठित गद्यांश एवं पद्यांश

अपठित गद्यांश
ऐसे गद्यांश जिन्हें परीक्षार्थी ने पहले नहीं पढ़ा हो, वे अपठित गद्यांश कहलाते हैं। यह परीक्षार्थियों के पठन कौशल के मूल्यांकन का उत्तम साधन है। अपठित गद्यांश परीक्षार्थी के भाषा संबंधी ज्ञान की जाँच करता है। CTET परीक्षा में अपठित गद्यांश एवं उन पर आधारित प्रश्न आते हैं। परीक्षार्थी को दिए गए गद्यांश को पढ़कर उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर देने होते हैं। गद्यांश किसी साहित्यिक विधा, वैज्ञानिक सूचना या लेख से संबंधित हो सकते हैं। गद्यांश आधारित प्रश्नों के माध्यम से परीक्षार्थी के ग्रहण करने की क्षमता तथा व्याकरण ज्ञान की जाँच की जाती है।
सीटीईटी परीक्षा में हिंदी
यदि परीक्षार्थी परीक्षा में भाषा-1 के रूप में हिंदी का चयन करते है, तो उन्हें गद्य और पद्य दोनों को मिलाकर कुल 15 प्रश्नों के उत्तर देने होते हैं, जिसमे 9 प्रश्न गद्य से तथा 6 प्रश्न पद्य से पूछे जाते हैं। यदि परीक्षार्थी परीक्षा में भाषा-2 के रूप में हिंदी का चयन करता है, तो उसे दो अपठित गद्यांशों को पढ़कर कुल 15 प्रश्नों के उत्तर देने होते हैं।
अपठित गद्यांश पढ़ते समय ध्यान देने योग्य बातें
(1) अपठित गद्यांश के सारे शब्दों का अर्थ एक बार में नही समझ सकते। अत: गद्यांश को पढ़ते समय एक शब्द या वाक्य पर नहीं रुकना चाहिए।
(2) प्रश्नों के उत्तर करने से पूर्व समय नियोजन करना आवश्यक होता है। परीक्षा में समय निर्धारित होता है।
(3) परीक्षार्थी का शब्द-कोश अपठित गद्यांश को हल करने में उसकी सहायता करता है। अत: परीक्षार्थी को शब्द-कोश पर ध्यान देना चाहिए।
(4) अपठित गद्यांश को पढ़ते समय पेन या पेंसिल का प्रयोग करना चाहिए, जिससे विषय पर ध्यान पूरी तरह से केन्द्रित हो जाता है।
(5) अभ्यास द्वारा पठन की गति को तेज करना चाहिए, जिससे कम समय में अपठित गद्यांश के मुख्य बिन्दुओं को निकला जा सके।
(6) आत्म-विश्वास के साथ प्रश्नों को हल करना चाहिए।
प्रश्नों को हल करने की विधि
(1) अपठित गद्यांश को हल करने के लिए परीक्षार्थियों द्वारा पहले दिए गद्यांश को तेजी से पढ़ना चाहिए, जिससे वह गद्यांश के विषय-वस्तु को समझ सकें।
(2) गद्यांश को तेजी से पढ़ने के बाद केवल प्रश्नों को पढ़ें विकल्पों को नहीं।
(3) प्रश्नों को पढ़ने के बाद गद्यांश को धीमी गति के साथ पढ़ें तथा गद्यांश की मुख्य बिंदु को अलग करें।
(4) मुख्य बिंदु के बाद उप-मुख्य बिदं ु को अलग कर ें तथा गद्याश्ं ा से लेखक के प्रयोजन तथा लक्ष्य का पता लगाएँ।
(5) गद्यांश पढ़ते समय उन वाक्यों और शब्दों को रेखांकित करें, जो प्रश्नों से मिलते हो या जिनका प्रयोग गद्यांश में बार-बार हो रहा हो।
(6) यदि प्रश्न में किसी शब्द का अर्थ पूछा गया हो, तो विकल्प चुनते समय यह ध्यान रखें कि वह विकल्प गद्यांश पर आधारित हो।
(7) प्रश्नों को पढ़कर अपठित गद्यांश के केंद्र बिंदु तथा उप केंद्र बिंदु की सहायता से उचित विकल्प का चुनाव करें।
(8) व्याकरण आधारित प्रश्नों के विकल्प चुनते समय यह ध्यान देना आवश्यक है कि चुना गया विकल्प व्याकरणिक दृश्टि से संबंधित है या नहीं। इस स्थिति में परीक्षार्थी अपना पूर्वज्ञान प्रयोग में ला सकते हैं। उदाहरण के लिए, यदि प्रश्न संधि से संबंधित है, तो परीक्षार्थी संधि के नियमों के अनुसार ही विकल्प का चयन करें।
यदि उपर्युक्त बिन्दुओं को ध्यान में रखकर इन प्रश्नों को हल किया गया, तो निश्चय ही परीक्षा में सफलता प्राप्त की जा सकती है।
अपठित पद्यांश
जिन पद्यांशों को परीक्षार्थी ने पहले नहीं पढा़ हो, उसे अपठित पद्याश्ं ा कहते ह।ैं अपठित पद्याश्ं ा परीक्षार्थी के साहित्यिक सादैं र्य को परखने तथा समझने की क्षमता की जाँच करता है। परीक्षा में यदि परीक्षार्थी ने भाषा-1 के रूप में हिंदी का चुनाव किया है, तो उसे पद्यांश पर आधारित प्रश्न भी मिलते हैं। पद्यांश आधारित प्रश्नों के माध्यम से परीक्षार्थी के पठन कौशल की क्षमता की जाँच के साथ-साथ अलंकार, छंदों, शब्द-भंडार तथा व्याकरण- ज्ञान की जाँच की जाती है।
यदि परीक्षार्थी परीक्षा में भाषा-1 के रूप में हिंदी का चयन करते हैं, तो उन्हें गद्य और पद्य दोनों से कुल 15 प्रश्नों के उत्तर देने होते हैं। जिसमे 9 प्रश्न पद्य से तथा 6 प्रश्न पद्य से पूछे जाते हैं।
अपठित पद्यांश को पढ़ते समय ध्यान देने योग्य बातें
(1) काव्य को पढ़कर सही अर्थ को समझने का प्रयास करे। इसके लिए परीक्षा से पहले ऐसे पद्याश्ं ो ं का अभ्यास लाभकारी होता है।
(2) पद्यांशों पर आधारित प्रश्नों के अभ्यास द्वारा शब्द-कोश में वृद्धि की जा सकती है। शब्द-कोश की वृद्धि किसी भी पद्याश्ं ा के अर्थ को सहजता से समझने में सहायक होती है।
(3) मौन पठन द्वारा कविता के केंद्रीय भाव को समझे तथा यह जानने का प्रयास करें कि कविता का भाव, रस तथा सन्देश क्या है।
अपठित पद्यांश को हल करने की विधि
(1) मौन वाचन करते हुए पद्याश्ं ा को 2 बार पढ़े। पहली बार पढ़कर यह जानने का प्रयास करें कि कविता किस विषय पर लिखी गयी है तथा कविता के माध्यम से कवि किस संदेश को पाठकों तक पहुँचाना चाहता है। दूसरी बार कविता पढ़ने से पूर्व नीचे दिए गए प्रश्नों को भी पढ़ ले तथा पढ़ते समय पंक्तियों पर विशेष ध्यान दें।
(2) कविता के सार को समझने का प्रयास करें।
(3) पद्यांश पढ़ते समय पंक्तियों में आये व्याकरणिक बिन्दुओं को प्रश्नानुसार रेखांकित करें।
(4) यदि प्रश्न में किसी शब्द का अर्थ पूछा गया हो, तो विकल्प चुनते समय यह ध्यान रखें कि वह पद्यांश से संबंधित हो।
(5) कविता का मूलभाव, केंद्रबिंदु तथा सार को समझने के बाद प्रश्नों को विकल्पों के साथ पढ़े तथा उचित विकल्प का चुनाव करें।
(6) यदि प्रश्न भाव से संबंधित हो, तो कविता पढ़ते समय यह ध्यान रखें कि कवि क्या कहना चाहता है।
(7) कुछ प्रश्न अलंकार से संबंधित होते हैं। अत: इन प्रश्नों के विकल्प चुनते समय दी गई पंक्ति में कौन-सा अलंकार है, इसकी जाँच कर लें।

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