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अध्याय 44. राजनीतिक विज्ञान – सरकार (Social Science for CTET & TET Exams)

अध्याय 44. राजनीतिक विज्ञान – सरकार

परिचय
लोगों का एक समूह जो राष्ट्र तथा राज्यों में निश्चित समय के लिए व्यवस्थित रूप से शासन करता है, उसे सरकार कहते हैं। सरकार का कार्य नया कानून बनाना, पुराने कानून को लागू रखना तथा सुदृढ़ रूप से देश को चलाना होता है। संसदीय पद्धति में सरकार का आशय राष्ट्रपति अधिशासी शाखा से होता है, जिसमें प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद् तथा राज्य में मुख्यमंत्री एवं मंत्री परिषद् होता है।
राष्ट्रपति
अनुच्छेद 52 के अनुसार, भारत में एक राष्ट्रपति होगा। इसमें संविधान की कार्यपालिका की शक्ति निहित होगी और इस शक्ति का उपयोग राष्ट्रपति अपने अधीनतम अधिकारियों के साथ मिलकर करेगा। राष्ट्रपति का कार्यकाल पांच वर्ष के लिए होता है। भारत का राष्ट्रपति निर्वाचित होने के लिए उसे भारत का नागरिक होना आवश्यक है। उसकी उम्र 35 वर्ष होनी चाहिए और उसे लोकसभा का सदस्य निर्वाचित होने की योग्यता हो। भारतीय सेवाओं का सर्वोच्च सेनापति राष्ट्रपति होता है। राष्ट्रपति देश का प्रथम नागरिक कहलाता है। राष्ट्रपति अपना त्यागपत्र उपराष्ट्रपति को सौंपता है। राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाकर उसे पदच्युत किया जा सकता है। यह अनुच्छेद 61 में वर्णित है। राष्ट्रपति को पद से हटाने के लिए संसद में एक प्रस्ताव प्रस्तुत करना होता है। इसमें एक चौथाई सदस्यों का समर्थन प्राप्त होना चाहिए।
उपराष्ट्रपति
उपराष्ट्रपति राज्यसभा का सदस्य होता है। भारत में एक उपराष्ट्रपति होता है। उपराष्ट्रपति बनने के पश्चात् वह व्यक्ति किसी लाभ के पद पर नहीं रह सकता है। वह कार्यकाल के दौरान संसद के किसी भी सदन या राज्य के विधानमंडल का सदस्य नहीं होता है। यदि वह पहले से किसी पद पर कार्यरत है तो उपराष्ट्रपति बनने के पश्चात् उस पद को त्यागना पड़ेगा। उपराष्ट्रपति बनने के लिए उसे भारत का नागरिक होना आवश्यक है। उसकी न्यूनतम उम्र 35 वर्ष होनी चाहिए। उसमें राज्यसभा का सदस्य निर्वाचित होने की योग्यता होनी चाहिए। उपराष्ट्रपति का चुनाव पांच वर्ष के लिए होता है। उपराष्ट्रपति का निर्वाचन दोनों सदन अर्थात् राज्यसभा एवं लोकसभा के सदस्यों के द्वारा किया जाता है। इस चुनाव में राज्य विधानमंडल के सदस्य भाग नहीं लेते हैं। यह निर्वाचन अनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत तथा गुप्त मतदान के द्वारा होता है। उपराष्ट्रपति के नामांकन प्रक्रिया में प्रस्तावकों की संख्या बीस होनी चाहिए और बीस मतदाताओं द्वारा समर्थित भी होनी चाहिए। इसके साथ ही 15000 ज़मानत राशि के रूप में जमा करना आवश्यक है। उपराष्ट्रपति अपना त्यागपत्र राष्ट्रपति को सौंपता है। उपराष्ट्रपति को राज्यसभा के सदस्यों द्वारा संकल्प पारित करके भी पद से हटाया जा सकता है। इसके लिए उसे 14 दिन पूर्व सूचना देनी होगी। राज्यसभा द्वारा संकल्प पारित होने के बाद उसे अनुमोदन के लिए लोकसभा भेजा जाता है। लोकसभा में अनुमोदित होने पर उसे पद से हटा दिया जाता है।
मंत्रिपरिषद्
मंत्रिपरिषद् का उल्लेख अनुच्छेद 74-78 में किया गया है। मंत्रिपरिषद् का गठन प्रधानमंत्री की सलाह से राष्ट्रपति के द्वारा किया जाता है। राष्ट्रपति को उसके कार्यों का संचालन एवं शक्तियों के प्रयोग में सहायता देने के लिए मंत्रिपरिषद् होती है। प्रधानमंत्री, मंत्रिपरिषद् का मुखिया होता है। मंत्रिमंडल के द्वारा देश के प्रशासन, आर्थिक सुधार, सुरक्षा तथा विदेश नीति को निर्धारित किया जाता है और मंत्रिमंडल के द्वारा निर्धारित नीति के अनुसार ही देश का शासन संचालित होता है। मंत्रिपरिषद् तीन प्रकार का होता है। कैबिनेट मंत्री, राज्यमंत्री और उपमंत्री। मंत्रिमंडल का गठन कैबिनेट स्तर के मंत्रियों से होता है। राज्य मंत्री और उपमंत्री की नियुक्ति कैबिनेट मंत्री की मदद करने के लिए होती है। कैबिनेट मंत्री अपने विभाग का अध्यक्ष होता है। राज्य मंत्री को किसी भी विभाग का प्रभार सौंपा जाता है। सरकार की नीति का निर्णय मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों के द्वारा किया जाता है। नीति जिस विभाग से संबंधित रहता है, उस विभाग के राज्यमंत्री मुख्य भूमिका निभाते हैं। संसद के सदस्यों को ही मंत्रिपरिषद् में शामिल किया जाता है। यदि बाहरी सदस्य को मंत्री बनाया जाता है तो उसे छह महीनों के भीतर संसद का सदस्य बनना होगा। मंत्रिपरिषद् लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होता है।

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